आज की चोपाई
धेनु मानस सद्ग्रन्थ की रचना हिमालय में हुई. ऋषि मुनियों के आशिर्वाद से ही यह पूर्ण हुआ. जिसमें कि 450 दोहे और 3600 चौपाईयां हैं. आप सिटी में रहते हो घर में गाय नही रख सकते तो कम से कम घर पर धेनु मानस तो रखो।जिससे गौमाता आप के दिल में रहगी । सभी हिन्दू भाई बहन जीवन में एक बार धेनु मानस ग्रन्थ (गौ गंगा कृपाकांक्षी गोपाल मणिजी महाराज द्वारा रचित)जरूर पढ़े। अपने घर पर मंगवाने के लिये सम्पर्क करे.. 09760919896,09412968738
Saturday, 19 December 2015
Friday, 18 December 2015
भारत के गो भक्तों से प्रश्न है ?????
भारत के गो भक्तों से प्रश्न है ?????
यदि कोई प्रतििष्ठत व्यक्ति है
उसके सामने दो िवकल्प है
एक तरफ है अपमान दूसरी तरफ है मौत
वो क्या चुनेगा ??
आपका उत्तर होगा मौत
इस भूमण्डल पर गो माता सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित है , वेद पुराण उपनिषद गीता भागवत रामायण , भगवान ने भी जिसकी महिमा गायी है , ऐसी प्रतिष्ठित गो माता का अपमान हम हिन्दुओं के द्वारा हुआ है इसलिए गो माता ने मौत को चुना है
गो माता में अपार शक्ति है उसमें तैंतीस करोड देवता है वो चाहे तो एक देवता खडा करके अपनी रक्षा कर सकती है लेकिन
हमारे द्वारा गो का अपमान होने पर गो माता जीना नही चाहती और वह मौत को स्वीकार कर रही है
गो माता को राष्ट्र माता बनाओ गो को भगवान की तरह अपने ईष्ट की तरह घर घर में पूजो और सेवा व सम्मान करो
गो रक्षा हो जायेगी
कोई कहता है गो राष्ट्रीय पशु हो
कोई कहता है गो राष्ट्रीय प्राणी हो
अंग्रेजों ने इस देश मे आकर हमारी गो माता को पशु बताकर बकरे और मुर्गे की तरह कटवा िदया
भारत के ऋिषयों ने पूरी दुिनया के लोगों को बताया है
गावो िवश्वस्य मातर:
गो माता जानवर नही भारत के लोगों की जान है
गो माता प्राणी नही इस देश के लोगों का प्राण है
इस देश में गो माता को राष्ट्र माता के पद पर बिठाओ
भारत के ऋिषयों ने पूरे देश और दुनिया को एक परिवार या घर के रूप में देखा है
घर बनता ही माँ से है
इस देश में राष्ट्र गीत भी है राष्ट्र गान भी है राष्ट्र पक्षी भी है राष्ट्र पशु भी है राष्ट्र िपता भी हैै
लेकिन हमारे राष्ट्र रूपी घर में राष्ट्र माता नही है
इसलिए गो माता को राष्ट्र माता बनाओ
और दूसरी बात िजस देश में शिलाओं की प्राण प्रतिष्ठा करने पर पत्थर भी भगवान बन जाता है तो िवचार करिए जिस गो माता की प्रतिष्ठा स्वयं भगवान ने की हो वह गो माता कितनी बडी भगवान होगी
इसलिए वेदों में लिखा है
गोस्तु मात्रा न विद्यते
गाय की बराबरी कोई नही कर सकता
उस गो माता के लिए हमे किसी मंदिर बनाने की जरूरत नही है गो माता के घर पहुंचते ही वह घर मंदिर बन जाता है
गो माता को वो सम्मान दो जो हम भगवान को देते हैं
आप एक दिन आकर
28 फरवरी 2016
को दिल्ली रामलीला मैदान गो रक्षा के िलए खडे हो जाओ
जो गाय की पूछ पकड लेता है उसे गो माता सींग पर उठाकर उच्च िशखर पर पहुंचा देती है
Thursday, 17 December 2015
Tuesday, 28 July 2015
""धेनुमानस ग्रन्थ"" रचयिता ""संत श्री गोपालमणि जी महाराज""
अर्थ :-- हे श्री कृष्ण अनुगामी भक्तों आप लोग विचार करो क्या स्वामी श्री कृष्ण को गाय के बिना कुछ सुहाता है | जो लोग नित्य गाय के संग खड़े रहते हैं, उनका स्वागत प्रभु आगे बढ़कर करते हैं ||
Thursday, 4 June 2015
परम पूज्य गौ गंगा कृपाकांक्षी गोपाल मणि जी महाराज के जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाये
यदि आप महाराज जी को शुभकामनाये देना चाहते है तो गौमाता चारा खिलाये।महाराज श्री के जन्म दिन पर हम सब संकल्प ले की जब तक गौमाता को समान (राष्ट्र माता का दर्जा ) नही मिल जाता तब तक चेन से नही बैठेंगे। जय गौमाता जय गोपाल माँआआआआ
Wednesday, 20 May 2015
Wednesday, 29 April 2015
दिव्य धेनुमानस
चौपाई - बसहिं सुरभि जहाँ तीरथ सोई। तजहिं प्रान मुक्ति सब कोई।। रोम - रोम सुर तीरथ चरना। केहि बिधि मातु करउँ मैं बरना।। अर्थ - जहाँ सुरभि गौ माता बसती है वहीं तीरथ होता है। जो गौ के सन्मुख प्राण छोड़ता है, वह हर व्यक्ति मुक्ति को प्राप्त करता है।(अन्तिम समय में जो राम नाम लेने का जो फल है वही गौ माता के स्पर्श का है। स्वयं विचार करे कि दोनों कार्य में कौन सा सरल है निश्चित ही गौ स्पर्श सरल है) जिस गौ माता के रोम - रोम में देवता हैं और पैरों में तीरथ है ( तीर्थ तो मेरे पैर के नीचे है) किस प्रकार माता मैं आपकी महिमा का वर्णन करूँ। धेनु मानस
Friday, 24 April 2015
धेनुमानस ग्रन्थ की चोपाईयां
तब बङा कठोर शब्द हुआ, सारे गोप एवं गोपियाँ दौड़ती आयी, जिस किसी प्रकार से कृष्ण को लिया और सोचने लगी कि नारायण ने आज सहायता की। धेनु मानस
Thursday, 23 April 2015
Dhenumanas धेनुमानस ग्रन्थ
गौ माता जगत के हित के लिए प्रगट हुई है, इसको परम हितैषी जानो। इस माँ की पूजा में लग जा, मोह, मद, अभिमान त्याग दे।
Tuesday, 21 April 2015
Dhenumanas धेनुमानस
छन्द - धन धन गोपाला हे नंदलाला गौ कारण जग आयो। सुन हे बनवारी बिनय हमारी गौ को नहिं बिसरायो। धरिके नररूपा हे सुरभूपा गौ चारन बनमाली। जेहि सृष्टि बनाई वही गौ माई दीन्हि सीख गौपाली। का करूँ प्रसंसा मानस हंसा गोकुल तारन आयो। तू अबिकारी जनमनहारी धनि धनि जो हियँ लायो। नंद जसोदा दीन्हि बिनोदा तप केवल गौ सेवा। यह दास तुम्हारो आन पधारो सरन गोपाल को लेवा। अर्थ - हे गोपाल अब सुन लो, हे नन्दलाला आप गौ के लिए आए हो। हमारी यह विनती है। हे बनवारी सुनो गौ को मत भूलो। हे देवताओं के राज़ा आपने नर रूप धारण किया। हे वनमाली गौ चराने आये हो। जिसने सृष्टि बनाई वही गौ माता है। गौ सेवा की सीख दी है। हे प्रभु क्या प्रसंशा करूँ आप मन सरोवर के हंस आप गोकुल को तारने आए हो। आप अबिकारी हैं। अपने जनो के मन को हरण करने वाले हो, वे लोग धन्य है जिन्होंने आपको अपने हृदय में बिठाया है। नन्द और यशोदा को आपने विनोद दिया, उनकी तपस्या गौ सेवा है। हे प्रभु, आपका यह दास है आकर कृपा करो गोपाल को शरण ले लो। धेनु मानस