धेनुमानस

धेनु मानस सद्ग्रन्थ की रचना हिमालय में हुई. ऋषि मुनियों के आशिर्वाद से ही यह पूर्ण हुआ. जिसमें कि 450 दोहे और 3600 चौपाईयां हैं. आप सिटी में रहते हो घर में गाय नही रख सकते तो कम से कम घर पर धेनु मानस तो रखो।जिससे गौमाता आप के दिल में रहगी । सभी हिन्दू भाई बहन जीवन में एक बार धेनु मानस ग्रन्थ (गौ गंगा कृपाकांक्षी गोपाल मणिजी महाराज द्वारा रचित)जरूर पढ़े। अपने घर पर मंगवाने के लिये सम्पर्क करे.. 09760919896,09412968738

Wednesday, 20 May 2015

धेनुमानस

माँ
धेनुमानस

Posted by Govats Radhe Shyam Ravoria at 02:12 No comments:
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धेनु मानस

पूज्य गोपाल मणि जी महाराज का कहना है कि देश की संस्कृति गौ व गंगा से है। गौ सेवा व पूजा की हमारे वेद, पुराण व उपनिषद में विस्तृत व्याख्या है। देश के लोगों में गौ माता की सेवा को लेकर जो धारणा थी, नई पीढ़ी उसे भूल रही है। समाज को धेनु मानस ग्रंथ के आधार पर गौ-पूजा एंव गौ सेवा का महत्व इस ब्लॉग के माध्यम से समझाने का हम प्रयास करेंगे । । हमारा संकल्प
हर व्यक्ति के घर में गौमाता का वास हो और हर घर में धेनुमानस का पाठ हो।
हर व्यक्ति गाय की महिमा को जाने और गौमाता से जुड़े।
हर व्यक्ति गौमाता के अमृत-गव्य ( दूध, दही, घी, गौमूत्र, छाँछ, गौबर, पन्चगव्य आदि) का सेवन कर अपने जीवन को सुखी हो

दास ने संकल्प लिया है कि गौ सेवा की कथा से नई पीढ़ी में गौ माता की महिमा व उसकी सेवा से मिलने वाले लाभ से अवगत कराएंगे।
गौ चरणो का दास
आपका मित्र
गोवत्स राधेश्याम रावोरिया
9042322241

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