Friday, 20 March 2015

परम योगनिष्ठ गौ गंगा कृपाकांक्षी पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज का संक्षिप्त जीवन परिचय:-

परम योगनिष्ठ गौ गंगा कृपाकांक्षी पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज का संक्षिप्त जीवन परिचय:-
परम पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी का जन्म मध्य हिमालय उत्तराखण्ड की पावन धरती बादशी गांव, पट्टी गमरी, जनपद उत्तरकाक्षी में 5 जून 1958 को गोशाला में हुआ. आपकी माता का नाम श्रीमती रामेश्वरी देवी एवं आपके पिता का नाम पं. श्री धनी रामजी था.
आपने 11 वर्ष की आयु तक गौ का ही दूध पिया. आपने कक्षा 5 से आचार्य तक की परीक्षायें प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण की. कक्षा 5 की परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने पर आपको तत्कालीन उ.प्र.सरकार ने 11 रुपये छात्रावृति प्रदान की.
प्रथमा से शास्त्री तक संस्कृत श्रीकाशी विश्वविद्यालय उत्तरकाक्षी उत्तराखण्ड, हिमालय में आचार्य की परीक्षा व्याकरण विषय के साथ एवं शिक्षा शास्त्री काशी विश्वविद्यालय बनारस से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की.
आपको बचपन में ही एक दिव्य महात्मा के दर्शन हुए, जो ना खाते थे, ना पीते थे. केवल पद्मासन में बैठकर ब्रह्मचिन्तन में खोए रहते थे. वे आपके साथ 3 दिनों तक रहे, बाद में महात्मा जी अदृश्य हो गये थे. आपने अपने जीवन काल में जप, तप, यज्ञ, अनुष्ठान उपवास किया. एक बार तो आपने 11 महीनें का भी उपवास रखा. आप केवल गौशाला में रहते थे. न सोते थे न खाते थे.केवल मंत्रो का उच्चारण करते थे. 24 घंटो में केवल आप पौन गिलास दूध पीते थे.
आपको कथा करने का आदेश साक्षात् गंगा माँ ने दिया है. हनुमान जी के दिशा निर्देश में आप सब कार्य करते हैं. कथाओं के माध्यम से ही आप गावों में स्वच्छता का अभियान, लोगो में सद् गुणों को ग्रहण करनें की प्रेरणा देते हैं. लोग आप की कथा सुनकर सहर्ष ही मदिरा पान का त्याग एवं बीड़ी सिगरेट का त्याग एवं अपने अवगुणों को सहर्ष ही छोड़ देते हैं. साथ-साथ आपने कथा के माध्यम से बलि प्रथा पर रोक लगाई. आपने गौ गंगा हिमालय जंगल एवं कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए भी आपने अभियान चलाये.
आपने गौ, गंगा एवं हिमालय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु पहाड़ी चोपड़ धर गौशाला में सन् 2005 में चैत्र नवरात्र से अश्विन नवरात्र 2005 तक तक श्री गोवर्धन लक्ष चण्ड़ी महायज्ञ का अनुष्ठान 101 याज्ञिक ब्राह्मणों के द्वारा 6 महीनें का यज्ञ सम्पन्न करवाया. तदोपरान्त आपने गौ हिमालय संरक्षण पदयात्रा गंगोत्री से दिल्ली तक 11 फ़रवरी 2008 से 28 फ़रवरी 2008 तक की. इस 18 दिनों की पदयात्रा में 5000 पदयात्री भी सम्मिलित हुए.
11 फ़रवरी बसंत पंचमी का वह पावन दिन जो आपकी माँ भगवती सरस्वती का भी जन्म दिवस है, उस समय गंगोत्री में 6 फ़ुट बर्फ़ के होते हुए भी आपने अपना संकल्प पूरा किया. इसी आशय से आपने महामाहिम महोदया श्रीमती प्रतिभा पाटिल एवं मा. प्रधान मंत्री भारत सरकार को गो बध रोकने एवं गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने तथा हिमालय के संरक्षण एवं सुरक्षा का ज्ञापन भारत सरकार को सौपा.
परम पूज्य गोपाल मणि जी महाराज ने भारत वर्ष में 53 श्री गोपाल गौ लोक धाम गोशालाओं की स्थापना की . जिसमें असहाय गो माताओं को आश्रय दिया जाता है.तथा 150 श्री गोपाल गो धाम समितियों का भी गठन किया गया है, ये क्रम अभी जारी है.
आपने समाज में ओछी राजनीति के चलते समाज में आई विखण्डता को भी अपनी सरस वाणी से तोड़कर समाज में प्रेम एवं भाई चारे का वातावरण सृजन किया है.
आपको कथा करते लगभग 25 वर्ष हो गये है. पहले आप राम कथा. भागवत् कथा, देवी भागवत् कथा, शिवमहापुराण, कथा हरिवंश पुराण, गरुण पुराण कथा आदि अनेक कथायें पूरे भारत वर्ष में करते थे. किन्तु अब आप केवल हिमालय के ऋषि -मुनियों के आशीर्वाद से गो कथा करते हैं. यह भारत वर्ष के इतिहास में आलौकिक कार्य ही हुआ है. यह धेनु मानस सद्ग्रन्थ की रचना हिमालय में हुई. ऋषि मुनियों के आशिर्वाद से ही यह पूर्ण हुआ. जिसमें कि 450 दोहे और 3600 चौपाईयां हैं. आपके द्वारा ही तरंग मासिक पत्रिका जिसमें की श्री भागवत गीता, रामचरित मानस एवं श्रीमद् भागवत कथा के प्रत्येक श्लोको एवं चोपाईयों की भी सरल शब्दों में व्याख्या प्रस्तुत की जाती है.

गौ कथा धेनु मानस की

  गौ कथा धेनु मानस की
इस देस मैं राम नवमी के दिन किसी बच्चे मैं राम का दर्शन कर के उसे पूजा नहीं जाता और कृष्ण जनम दिवस पर भी किसी बच्चे मैं कृष्ण का दर्शन कर के उसे पूजा नहीं जाता पर इस देस मैं एक नहीं दो दो बार नौ नौ दिन नवरात्रि मैं कन्या को देवी के रूप मैं पूजा जाता हैं। इस देस मैं केवल गौ माता और कन्या को प्रत्यक्ष देवी मान कर उनकी पूजा होती हैं।
धेनु मानस की एक चोपाई हैं : गौ कन्या दोनों एक रूपा।
इन सम नहीं कोउ जगत अनूपा। भारतीय गौ माता मैं ३३ करोड़ देवता हैं। ये बात साबित करता हुआ एक प्रसंग :एक भाई ने थोडा थोडा जहर गौ माता को दिया और फिर गाय के दूध मैं उसने मशीन लगाया जहर नहीं था। गाय के गोबर मैं उसने मशीन लगाया जहर नहीं था। गाय के गौ मूत्र मैं उसने मशीन लगाया जहर नहीं था। वो सोचने लगा जहर गया तो गया कहाँ। फिर उसने गाय के गले मैं देखा तो एक सुजन सी हो गयी थी। उसमे उसने मशीन लगाया सारा जहर वही था। गाय के गले मैं शंकर भगवान को वास हैं। शंकर भगवान ने विष पिया था और अभी भी सारा विष पि जाते हैं।
बोलो शंकर भगवान की जय। बोलो गौ माता की जय।

आप ये पूछ सकते हैं की हम तो विज्ञान के युग मैं जीते हैं हमें वैज्ञानिक ढंग से समजावो तो एक भाई मशीन ले कर आया की आप इस मैं मंत्र बोलो। मंत्र बोले ओम नमो भगवते वासुदेवाय आदि मंत्र बोले किसी मंत्र पर मशीन ४ मीटर गई किसी मंत्र पर ६ मीटर गई। पर माँ मंत्र पर मशीन २६ मीटर गई। इसी लिए सबसे पावरफुल मंत्र है माँ। इसी लिए आज से क्या बोलो गौ माता की जय।